Wed. Mar 11th, 2026

बेतिया में बकरी पालन पर किसान–वैज्ञानिक संवाद, वैज्ञानिक विधि से आय वृद्धि का आह्वान

जन-जातीय किसानों में टीकाकृत बकरियों का वितरण एवं बकरी पालन पर वैज्ञानिक परिचर्चा सम्पन्न

apnibaat.org
बेतिया : पश्चिम चम्पारण जिला में बेतिया में किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से बकरी पालन विषय पर एक दिवसीय किसान–वैज्ञानिक संवाद का आयोजन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर,पटना के वैज्ञानिकों ने किया। यह कार्यक्रम संस्थान के निदेशक डॉ. अनुप दास के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। जिसका मुख्य उद्देश्य किसानों के बीच बकरी पालन के प्रति जागरुकता बढ़ाकर उनकी आय में वृद्धि करना रहा। उपर्युक्त कार्यक्रम संस्थान के अनुसूचित जनजाति उपयोजना के अंतर्गत आयोजित किया गया। जिसमें पश्चिम चम्पारण जिला के रामनगर प्रखण्ड के नौरंगिया, नौतनवा और गौवर्धना गांव तथा बगहा प्रखण्ड के हरनाटांड़ गांव के लगभग 50 अनुसूचित जन-जाति किसान शामिल हुए। उपर्युक्त कार्यक्रम के क्रम में डॉ. पी.सी.चंद्रन ने किसानों को सम्बोधित करते हुए बताया कि बकरी पालन ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका का एक महत्वपूर्ण साधन बन सकता है, बशर्ते किसान उचित प्रबंधन और पशु स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दें। उन्होंने बताया कि बकरियों में कई संक्रामक रोग जैसे पीपीआर (बकरी प्लेग), खुरपका-मुंहपका तथा गोट पॉक्स होते हैं, जो बकरी पालकों के लिए काफी क्षति पहुँचाते हैं और हानिकारक सिद्ध हो सकते हैं। इन बीमारियों के लक्षण दिखाई देने पर पशु चिकित्सक से समय पर परामर्श लेना अतिआवश्यक है। उन्होंने किसानों के समक्ष बकरियों में पीपीआर रोग की रोकथाम के लिए टीकाकरण का प्रदर्शन भी किया। किसानों की आय में सुधार के उद्देश्य से लगभग 50 किसानों के बीच टीकाकृत बकरियों का वितरण किया। टीकाकरण से बकरियों में रोग फैलने की संभावना कम हो जाती है तथा मृत्यु दर में कमी भी आती है। इस प्रकार किसान बकरियों की संख्या बढ़ाकर अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं। इस अवसर पर डॉ.रोहन कुमार रमण ने किसानों को बकरियों के संतुलित आहार, साफ-सफाई, उचित आवास तथा रोगों की पहचान के महत्व पर विस्तार पूर्वक जानकारी दिया। उन्होंने बताया कि बकरियों के आंतों के कीड़े (परजीवी) उत्पादन और वजन बढ़ने पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं। इसलिए सभी किसानों को कीड़े नष्ट करने वाली दवाओं का वितरण भी किया तथा उनके उपयोग की जानकारी दी गई। डॉ. विवेकानंद भारती ने कहा कि यदि किसान वैज्ञानिक विधि अपनायें तो बकरी पालन कम लागत में अधिक लाभ देने वाला व्यवसाय बन सकता है। उन्होंने बताया कि बेतिया क्षेत्र के किसानों के लिए ब्लैक बंगाल नस्ल की बकरी पालन विशेष रुप से लाभकारी है। इसके दृष्टिगत किसानों में ब्लैक बंगाल नस्ल की बकरियों का वितरण किया गया। बेतिया में इस कार्यक्रम के सफल आयोजन में बृजना फाउंडेशन की प्रधान तन्वी शुक्ला का सहयोग प्रशंसनीय रहा। उन्होंने किसानों को बकरी पालन अपनाने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर संस्थान के तकनीकी पदाधिकारी संजय राजपूत भी उपस्थित रहे।

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By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

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