
वाटिका में पुष्प खिलते हैं और सारे वातावरण को सुगंध से भर देते हैं: विमल सर्राफ
जीवन भी एक ऐसा ही पुष्प है,जिसकी सुगंध बिखर जाने से चारों ओर मादकता का वातावरण छा जाता है
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रक्सौल: वाटिका में पुष्प खिलते हैं और सारे वातावरण को सुगंध से भर देते हैं। जीवन भी एक ऐसा ही पुष्प है,जिसकी सुगंध बिखर जाने से चारों ओर मादकता का वातावरण छा जाता है। उपर्युक्त विचार लायंस क्लब ऑफ रक्सौल के अध्यक्ष सह मीडिया प्रभारी सह सामाजिक कार्यकर्ता लायन बिमल सर्राफ ने प्रेस से साझा किया।जीवन के भी कुछ स्तंभ हैं,जिनके आधार पर सारा जीवन टिका है,अगर ये स्तंभ कमजोर हैं तो जीवन का कोई महत्व नहीं है।ये आधार हैं – दृढ़संकल्प,आत्मविश्वास, निश्चित उद्देश्य,अनुकूल वातावरण, श्रद्धा, उत्तम सही विचार,इन्हीं शक्तियों पर जीवन का ढांचा निर्भर होता है।दृढ़ संकल्प में बड़ी शक्ति होती है,जो मनुष्य के जीवन का कायापलट कर देती है। इस संसार के इंसानी जीवन में विषमता का कारण है-दृढ़ संकल्प की कमी,जिसके कारण कोई भी कार्य मन मुताबिक ना होने की स्थिति में बीच में ही छोड़ देते हैं।अपने संकल्प को टूटने ना दें।भोजन जितना जरूरी है जीने के लिए उतना ही सफलता के लिए आत्मविश्वास भी जरूरी है।आत्मविश्वास वह शक्ति है;जो तूफानों को मोड़ सकती है, संघर्षों से जूझ सकती है और पानी में भी रास्ता,अपना मार्ग खोज लेती है।अनुकूल वातावरण से हर व्यक्ति स्वतंत्र चिंतन करता है साथ ही रुचि के अनुसार अपना कार्य करता है।ऐसा आज तक नहीं हुआ है कि गलत वातावरण में रह कर कोई अपना विकास कर सका हो।श्रद्धा का भी जीवन में एक अलग ही महत्व है, श्रद्धा प्रायः हमें बताती है कि जब आगे कोई रोशनी नहीं दिखती ,तब हम अंधेरे में ही सुरक्षित रह कर आगे बढ़ सकते हैं।उसी तरह उत्कृष्ठ जीवन के लिए विचारों की सही दिशा जरूरी है।विचारों में बहुत बड़ी शक्ति होती है जो मनुष्य के विचारों को सागर के समान विशाल बनाए रखता है, परिस्थितियां उसकी दासी बनकर चक्कर लगाया करती हैं।इसलिए जीवनरूपी उपवन में दृढ़ संकल्प, आत्मविश्वास, निश्चिंत उद्देश्य ,श्रद्धा एवं सही विचाररूपी पुष्प खिलने चाहिए,तभी जीवन सार्थक माना जाएगा।
