
सिद्धनाथ घाट बक्सर : बामन भगवान की जन्मभूमि , श्रीराम की शिक्षा व कर्मभूमि, उत्तर वाहिनी भागीरथी गंगा बक्सर के प्रसिद्ध सिद्धनाथ घाट पर श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया गया है। इस क्रम में विश्वाचार्य विद्या वाचस्पति ब्रह्मपुर पीठाधीश्वर आचार्य धर्मेन्द्रजी महाराज सूर्यवंश की कथा का विस्तार देते हुए कहा कि श्रीराम की जीवनशैली, जीवन व्यवहार सत्यं शिवम् सुन्दरं जीवनशैली का श्रेष्ठ संविधान हैं। श्रीराम मानव स्वरुप में सरल, तरल, विमल, विरल है।पुत्र राम, भाई राम, मित्र राम, शिष्य राम, पति राम, राजाराम अनुकरणीय व प्रशंसनीय हैं। यहां तक कि शत्रु रावण भी यह कहने से अपने को रोक नहीं पाया कि शत्रु हो तो राम जैसा। सीता हरण के बाद रावण को उदास देख मन्दोदरी पूछती है, अब तुम उदास क्यों? रावण कहता है सीता मेरे तरफ देखती नहीं। फिर मन्दोदरी कहती हैं तुम रुप बनाने में दक्ष हो, श्रीराम का रूप बनाकर देख जरा। रावण कहता है कि राम का रूप भी बनाकर देख लिया। मंदोदरी कहती हैं फिर क्या हुआ? रावण कहता है कि जैसे ही राम का रूप बनाया हूं , वैसे ही मेरा विचार ही बदल जाता, सीता के प्रति दृष्टिकोण ही बदल जाता। मेरे राम ऐसे हैं। आचार्य ने विस्तार से श्रीराम के जन्म के बाल लीला, विवाह लीला, वन लीला, रण लीला, राज लीला, साकेत गमन लीला पर गंभीरता के साथ शिक्षाप्रद कथा अभिव्यक्त किया। सूर्यवंश के अन्य राजाओं यथा इक्ष्वाकु, शर्यति, दिष्ट, नरिष्यंत, पृसध्र, नभग, नभाग, अम्बरीष, युवनाश्व, मंधाता, त्रिशंकु, हरिश्चंद्र, सगर भागीरथी, खटवांग, रघु, अज की सूत्रवत कथा कहते हुए गंगा अवतरण की दिव्य कथा सुनाया। आचार्य ने कल चन्द्र वंश की कथा कहने की सूचना दी। कथा में आये भक्तों की सेवा व्यवस्था पं शिवजी बाबा और उनके भक्त सहयोगी संभाला है। कथा की पूर्णाहुति 22 जनवरी 2026 को और विशाल भंडारा 23 जनवरी 2026 को संपन्न होगा।
